Sunday, March 1, 2015

‘बेबी’

‘नीरज पाण्डेय’ को बतौर निर्देशक मैं उन निर्देशकों में शामिल करता हूँ जिनकी व्यावसायिक फ़िल्में कभी निराश नही करती है. ‘बेबी’ देश की एक सीक्रेट सुरक्षा एजेंसी के काम करने और देशभक्ति के जुनून की कहानी है. इसकी कहानी की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि ये काफी कसी हुई कहानी है इसमें आप पल भर के लिए भी फिल्म से बाहर नही निकल पातें हैं.फिल्म के दौरान खुद मैनें अपने व्हाट्स एप्प के मैसेज इग्नोर किए. बेबी देश के लिए जीने का जुनून रखने वाले अफसरों के काम करने की कहानी है. फिल्म के कथानक का केंद्र भले ही आतंकवाद हो परन्तु फिल्म में सामानांतर रूप से एक महीन संवेदना भी यात्रा करती है जिसमे चाहे सुरक्षा से जुड़े अफसर अजय (अक्षय कुमार) का अपनी पत्नी को ये न बता पाना कि वो काम क्या करता है या फिर खुद की बेटी के जन्मदिन पर भी सीक्रेट मिशन के चलते न आ पाना हो. फिल्म में गाने के रूप में एक छोटा सा अंतरा है मगर वो भी बेहद भावपूर्ण है वो पलके नम कर देता है. सारी फिल्म आतंकियों को पकड़ने और उनके मिशन को निष्फल करने की कहानी हैं मगर इतनी खूबसूरती से फिल्म को बुना गया है कि आप फिल्म देखते बेहद रोमांचित रहते है.फिल्म में अजय की पत्नी का फोन पर फोन रखने से पहले अधीर हो यह कहना कि ‘बस मरना मत’ अपने आप में बेहद मारक और भावपूर्ण डायलॉग है जो एक पत्नी की फ़िक्र को बताता है. बेबी में डैनी चीफ कमांडिंग अफसर की भूमिका में बेहद जंचे हैं उनकी बॉडी लैंग्वेज एक शार्प अफसर जैसी है. फिल्म का एक महत्वपूर्ण मैसेज यह भी है कि हम हिन्दू या मुसलमान होने से पहले इंडियन हैं.
फिल्म में सऊदी अरब में रात में रेत पर फिल्माएं गए कुछ सीन वास्तव में बहुत बेहतरीन हैं.बेबी के जरिये हम सीक्रेट मिशन पर काम कर रहे अफसरों की कार्यशैली को नजदीक से जान पाते हैं उनके हौसले जूनून और जोखिम को देखकर आपको फख्र होता है कि कुछ अफसर वास्तव में देश के लिए इस तरह से जीते है.
फिल्म में सभी एक्टर्स ने दमदार काम किया है मुझे फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर का काम विशेष पसंद आया एक एक किरदार के लिए एकदम परफेक्ट चेहरे लिए गए फिल्म में पाकिस्तानी मौलाना का रोल करने वाले का तकरीर और टीवी पर भारत के खिलाफ बोलना एकदम से जीवंत लगता है.अनुपम खेर के जरिए फिल्म में थोड़ा सा चुस्त हास्य भी है. दक्षिण के अभिनेता राणा भी बेहद जबरदस्त लगे है. इंटरवल के बाद थोड़ी सी फिल्म में अतिशय नाटकीयता है लेकिन वो कहानी के साथ घुल मिल जाती है. जब आप फिल्म का एक हिस्सा बन जाते है तब फिल्म का इंटरवल जरूर ऐसा लगता है कि ये बहुत जल्दी हो गया है.
कुल मिलकर मेरे हिसाब से बेबी एक पैसा वसुल फिल्म है जिसको मेरी सलाह से देखा जा सकता है और शायद आपको निराशा हाथ न लगे.

डॉ. अजित
[ मैं  कोई फिल्म समीक्षक नहीं हूँ, क्योंकि समीक्षा करनी मुझे आती नहीं. मै तो सिनेमा का एक ईमानदार दर्शक भर हूँ. ]

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